Apr 19, 2020 · कविता

नारी

नारी

अपने जीवन में नारी लाखो त्याग देती है
बांटती खुशियां सबको खुद वैराग लेती है
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नारी सैकड़ों गमो को चुप सह जाती है
फिर भी वो एक खिलौना बनके रह जाती हैं
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औरत का दिल तो एक दर्पण होता है
जरासे प्रेम में वो सभी को अर्पण होता है
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कहीं बेटी कहीं बहन कहीं मां बन जाती है
नारी एसी शक्ति है जो पूरा जहां बन जाती है
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नारी पूजा नारी आस्था नारी सच्ची भक्ति है
नारी काली नारी दुर्गा नारी आदी शक्ति है
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नारी की पूजा होती थी मेरे हिंद वतन में
जाने आग ये कैसी लग गई आज चमन में
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जिसके सीने का दूध पी कर बडा होता है
जिसके आंचल की छांया में चैन से सोता है
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उसी को तकलीफ देने में जरा नहीं डरता है
उसी नारी का बार -बार अपमान करता है
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अपनी इज्जत कोई तके तो आग लग जाती है
दूसरों की बहन बेटी देख वासना जग जाती है
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अब सारे भारत देश में हाहाकार मची हुई है
कहां है वो जगह जहां इंसानियत बची हुई है
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आज देखो इंसान इमान पे नहीं टिक रहा है
अब साठ क्या आठ क्या कुछ नहीं दिख रहा है
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कुछ पागल भेडियों ने नारी को गाली बकदी है
हवस के अंधो ने औरत वस्तू बनाके रखदी है
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एसे पागल कुत्तों को समाज से बहार काढना है
खडे चौराहे पे करके बीचो बीच से फाडना है
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हिन्दू मुस्लिम मत देखो नारी का सम्मान करो
आने वाली पीढियों में सीधा सा ये ज्ञान भरो
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बेटों का आधार सही हो देना गंदी सीख नही
बेटी बहन किसी की भी गंदा तकना ठीक नही
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जब तक इस धरनी पे नारी का मान नही होगा
आजाद मंडौरी तब तक ये देश महान नहीं होगा

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Ajad Mandori
Ajad Mandori
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