नारी

-: नारी :-
दोस्ती समुंदर से करनी थी , और बहना नदी जैसा था उसे , भीड़ की शोर में गुम थी कब से वो , अब झरनों सा शोर करना था उसे,
मासूम तो थी ही वो शुरू से , बस चिल्लाना सीख लिया उसने , कुछ लोगो ने घर में बैठने की नसीहत क्या दी , घर ही छोड़ दिया उसने , हा ..घुटी, दबी हुई आवाज को उठाना सीख लिया उसने ।
लाज शर्म हया , सब आती थी उसे , बस कुछ रिवाजों, बंधनों और परंपराओं, को बदलने के लिए सब छोड़ दिया उसने ,
एक नारी ने बहुत कुछ बदल कर इतिहास रच दिया ,
@dear diary

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लेखक हूं या नहीं, नहीं जानता , हा पर चले आते है कुछ शब्द लबो...
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