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नारी

निहारिका सिंह

निहारिका सिंह

कविता

August 18, 2017

मैं विवश नही अब ,
मैं आदिशक्ति की ज्वाला हूँ ।
मैं हूँ अमृत ,
मैं ही विष का प्याला हूँ ।
मैं ही सृजनकर्ता ,
मैं संघराक हूँ ।
मैं देवों की जननी ,
संपूर्ण सृष्टि की पालक हूँ ।
पहचान मुझे मैं नारी हूँ ,
मैं पत्नी ,बहन , तेरी महतारी हूँ ।

निहारिका सिंह

Author
निहारिका सिंह
स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।
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