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नारी शोषण

विनय अवस्थी

विनय अवस्थी

कविता

April 7, 2017

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नव शिशु रुदन सुनते ही दर्द भूल जाते हैं
बहते अश्क माँ के कोरों में सूख जाते हैं
संवेदना भावों के प्रवाह को संतुलित कर
असह्य प्रसव पीड़ा क्षण में भूल जाते हैं
.
देवत्व का छद्म चोंगा ओढ़ जो मिलते हैं
वे ही नारी अस्मिता तार तार करते हैं
दोष नारी का या पुरुष का, जानना नहीं
साधुवेश धारी ही सीता अपहरण करते हैं
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विनय कुमार अवस्थी
स्वरचित
07.04.2017

Author
विनय अवस्थी
वर्तमान निवास : देहरादून (उत्तराखंड) व्यवसाय : अपर महाप्रबंधक , एन टी पी सी लिमिटेड (देहरादून ) शैक्षणिक योग्यता : बी ई (मैकेनिकल ) मोतीलाल नेहरु रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज , इलाहाबाद पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेशन इन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, आई आई एम... Read more
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