नारी शक्ति को समर्पित एक रचना

उत्कर्ष के ऊंचे सौपान पर बैठी
यह नारी है।
आज भी असहाय है,
बेचारी है।।

कोई ममता की देवी कहता है,
कोई
प्यार की मूर्ति,
अथाह संबल है
भरी है अकूत स्फुर्ति।
लेकिन
फिर भी
किस्मत की मारी है।

कभी प्यार में धोखा,
कभी विश्वास ने रोका।
कभी समाज ने टोका।
क्या क्या लाचारी है।

जब चाहा समाज ने अपनाया,
जब चाहा ठुकराया।
हमेशा पिसती रही है,
दुनिया के न जाने,
कितने ताने;
सहती रही है।
तब भी पुरुष की आभारी है।

कभी दरिंदों ने वसन को
किया है तार तार
कभी लूटा है अस्मत को
बार बार।
अजब इसकी कहानी है
प्रेम की भूखी है
दीवानी है।
बेबस है
प्यार की मारी है।
अटल मुरादाबादी
बी ई ,एम बी ए;एम फिल
सम्प्रति दिल्ली सरकार में सिविल इंजीनियर के पद पर कार्यरत।

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