नारी : तू अतुलनीय है !

नारी: तू अतुलनीय है !

नारी, तू अतुलनीय, वन्दनीय है ||
नारी, तू धरनीय है, तू वरणीय है ||
शारदे रूप में ज्ञान ने तुझे चुना,,
नारी, तू ईश्वरीय है, पूज्यनीय है ||

नारी, तू शक्ति-रूपा, सशक्त है ||
नारी, तू सद्भावनी, अनुरक्त है ||
लक्ष्मी रूप मे धन ने तुझे चुना,,
नारी, तू करूणीय, तू संयस्त है ||

नारी, तू ममतामयी, तू ममत्व है ||
नारी, तू अग्रणीय है, तू सर्वस्व है ||
गौरी रूप में शक्ति ने तुझे चुना,,
नारी, तू सुखदायिनी, भू-तत्व है ||

तेरे कर-कमलों में कर्मकौशल है ||
तेरे दो चरणों में स्वर्ग-स्थल है ||
है कौन-सा कार्य अछूता तुझसे,,
हर काज तेरी खातिर सरल है ||

==============
दिनेश एल० “जैहिंद”
26. 09. 2018

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share