नारी तुम अपनी पहचान करो ।

नारी तुम अपनी पहचान करो ।
उठकर अपना सम्मान करो ।
अबला नहीं तुम तो सबला हो
शक्ति हो तुम ये तो ध्यान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो।
उठकर अपना सम्मान करो।
*
ममता की तो मूरत हो तुम ।
प्रेम भाव की सूरत हो तुम ।
सबके लिए तो तुम जीती हो
पर तुम भी हो कुछ ज्ञान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो।
उठकर अपना सम्मान करो।
*
सबकी खुशी में खुश हो लेती हो।
अपने आंसू को तो पी लेती हो ।
अबला हो ये क्यों दर्शाती हो तुम
जागो और अपना उत्थान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो ।
उठकर अपना सम्मान करो ।
@पूनम झा। कोटा,राजस्थान।
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नाम-पूनम झा स्थान- कोटा,राजस्थान विधा- गद्य एवं पद्य में हिंदी व मैथिली में लेखन डेढ़...
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