Mar 8, 2017 · दोहे

नारी का सम्मान

पेंडिंग हों जहँ रेप के, . केस करोड़ों यार !
तहँ रमेश महिला दिवस, लगता है बेकार !!
कहने को महिला दिवस,. सभी मनाएं आज।
नारी की लुटती रहे, ….मगर निरंतर लाज !!
बेटी माँ सासू पिया,..सबका रखे खयाल !
नारी के बलिदान की,क्या दूँ और मिसाल !!
नारी के सम्मान की, बात करें पुरजोर !
घर में बीवी का करें,तिरस्कार घनघोर!!
नारी का होता नहीं, वहां कभी सम्मान !
जहां बसे इंसान की ,.. सूरत में हैवान !!
उलट पुलट धरती हुई,बदल गया इतिहास !
पृथ्वी पर जब जब हुआ नारी का उपहास !!
नारी को ना मिल सका,उचित अगर सम्मान !
शायद ही हो पाय फिर भारत का उत्थान !!
नारी की तकदीर में,. कहाँ लिखा आराम !
पहले ऑफिस बाद में,घर के काम तमाम !!
सास ससुर बच्चे पती,जो भी रहता साथ !
ध्यान सभी का आपको,काम करे निस्वार्थ !!
नारी ही करती नही,नारी का सम्मान !
नारी के गुणधर्म की,कैसे हो पहचान !!
रमेश शर्मा

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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !...
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