कविता · Reading time: 1 minute

नारी का अस्तित्व ( महिला दिवस पर विशेष ” कविता”)

नारी हूं, नारायणी हूं मैं,
ममता-रूपी सागर हूं मैं ।

काव्य-संगीत और सौरभ-सौंदर्य ,
की अनुपम-प्रतिमा हूं मैं ।

शक्ति का ही दिया हुआ
शांति का ही एक रूप हूं मैं,

शीतल छाया की आशा हूं मैं,
मनोहर-प्रेम की परिभाषा हूं मैं ।

नारियों के धैर्य की सीमा और,
शुद्ध-आत्मा से उठी पुकार हूं मैं ।

सत्ताधारियों के लिए दया-धर्म का संदेश हूं मैं,
दुनिया की पलटकर दशा,
हर मुसीबतों का कर सकती हूं अंत मैं ।

प्रजा की सोई हुई अभिलाषा को
आशा-रूपी दिपक से जगा सकती हूं मैं।

साहित्य पीडिया आबाद विशाल-मंच पर,
कुदरत की अनमोल-सौगात हूं मैं ।

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मुझे लेख, कविता एवं कहानी लिखने और साथ ही पढ़ने का बहुत शौक है । मैं नवोदय विद्यालय समिति, क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल ( केन्द्रीय सरकार के अधीन कार्यरत एक स्वायत्त…
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