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नारी का अपमान

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

July 3, 2017

कब तक यूं होता रहेगा
नारी का अपमान

कहता है जिसको लक्ष्मी
उसका नहीं सम्मान

मां ,बेटी ,बहन, बहू का रिश्ता
बखूबी निभाती हैl

फिर भी इस जहान में
दर्द ही क्यों पाती है?

कदम कदम पर छलने को
बैठे लाखो शैतान

नियत खोटी हो जाती है
ऐ कैसे इंसान

घर हो या बाहर
अपना हो या पराया

इस बेचारी नारी ने अपने को
सुरक्षित कहीं न पाया

अब उठाना होगा नारी को तलवार
ऐसो को खत्म करना होगा कर प्रहार

अपनी रक्षा खुद करो
लो काली अवतार

बुरी नजर से जो देखे
दो गर्दन उतार l

रीता यादव

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Author
Rita Yadav
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