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नारी अबला नहीं अपितु वह ही तो है बल दाता !

अनुराग दीक्षित

अनुराग दीक्षित

कविता

September 10, 2017

नारी अबला नहीं अपितु वह ही तो है बल दाता !

वह ही माता वही विधाता वो ही तो सुख दाता,
उस से ही यह सृष्टि बनी है, उसकी सब कृति हैं,
तो फिर तुम्ही बताओ इस नारी में क्या बिकृति है,
महाशक्ति का रक्त सदा जो हम सब में बहता है,
वही रक्त तो भाई इस नारी में भी रहता है,
फिर क्यों भाई वह सदैव है यों उदास सी रहती,
और कहीं न कहीं सदा है यों प्रताड़ना सहती,
नारी नर की है सदैव ही अर्धांगनी कहाती,
फिर क्यों उसके जीवन में यों दुःख की सेज समाती !!

Author
अनुराग दीक्षित
मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं... Read more
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