गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

नाम कैसे दे दूँ!

तेरे मेरे सपने …

अपने प्यार को सपना नाम कैसे दे दूँ
सपने तो अक्सर अधूरे ही रह जाते है

अपने प्यार को धड़कन कैसे नाम दे दूँ
जाने ये धड़कन कब साथ छोड़ देती है

अपने प्यार को आफताब कैसे नाम दूँ
सुबह से शाम तक ही तो साथ रहता है

प्यार को चौदहवीं का चाँद नाम क्यूँ दूँ
रात भर ठहर भोर होते ही चल देता है

“तेरे मेरे सपने” प्यार की अमर दास्ताँ है
अमर प्यार को ये नाम कैसे और क्यूँ दूँ
“दिनेश”

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