कविता · Reading time: 1 minute

नाना और पान

नाना मेरे खाते थे,
बहुत ही ज्यादा पान
रोज सुबह जाते थे,
वो पान की दुकान
दुकान पे एक बार,
ऐसा कुछ हो गया
नाना मेरा पान खाके,
वही पे सो गया
जब उनको होश आया,
खुद को मिलो कोस दूर पाया
उनको अब चल गया पता,
की पान मे उनका मिला था भांग
तब उसी दिन से उन्होंने,
सम्हाल ली अपनी टांग
उस दिन उनका हुआ बहुत अपमान
पर फिर भी हमलोग करते हैं,
उनका बहुत सम्मान।

मौलिक
Kn

2 Likes · 245 Views
Like
You may also like:
Loading...