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नादान परिंदा………..डी. के. निवातियाँ

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

September 23, 2016

मैं आया नादान परिंदा अनजान की तरह !
लौट जाऊँगा एक दिन मेहमान की तरह !!

क्या सहरा,क्या गुलिस्ता, हूँ सब से वाकिफ
कट जायेगा ये भी सफर जाते तूफ़ान की तरह !!

ढूंढ कर अन्धकार में भी प्रकाश की किरण
पाउँगा मंजिल मैं मुसाफिर अनजान की तरह !!

ना करो ऐ दुनिया वालो मेरे ईमान को बदनाम
कहि हो न जाऊं मशहूर बेइमान इंसान की तरह !!

आकर चले जाना ही “धर्म” उसूल जिंदगी का
जब तक हो झनको सरगम की तान की तरह !!
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डी. के. निवातियाँ ________

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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