Sep 8, 2019 · कविता
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-: नहीं रुकेगा चन्द्रयान :-

-: नहीं रुकेगा चन्द्रयान :-

ऐ चाँद फ़तह तो तुझे कर ही लेंगे
तेरी धरा पर तिरंगा फहरा ही देंगे
बस थोड़ा और इंतजार कर
तेरी माटी को भी हिंदुस्तानी कर देंगे
तूने भारत का मान बढ़ाया
नाज़ है तुझपर ऐ विज्ञान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान

घनघोर निराशा के बादल
भले ही नभ पर छाए हों
भले अरियों ने अ-सफलता के
लाख तराने गाए हों
जब तक देह में सांस रहेगी
लगे रहेंगे जब तक है प्राण
नहीं रुकेगा चन्द्रयान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान

सिंह अभी आचेत हुआ है
मृत समझ कर भूल न करना
थोड़ा सा विश्वास रखो तुम
फिर होगी घनघोर गर्जना
नहीं झुका था नहीं झुकेगा
सिर तेरा रे हिन्दुस्तान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान

धैर्य रखो उज्जवल भविष्य है
अतीत भुला तुम जाओगे
निराश हो कर न बैठ ना तुम
इतिहास बना तुम जाओगे
क्षणभंगुर अ-सफलता से
नहीं घटेगी हिन्द की शान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान
नहीं रुकेगा चन्द्रयान

– पर्वत सिंह राजपूत (अधिराज)

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Parvat Singh Rajput
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