Aug 6, 2016 · मुक्तक
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नशा………१

नशा………१

नशा दौलत का जब सर चढकर बोलता है
हर एक शै: को कागजी टुकडो से तोलता है
कर देता है कत्ल जहन से सब जज्बातो का
इंसानियत को भी अपने पैरो तले रौदंता है ।।



डी. के. निवातियॉ________@

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
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