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नव संवत्सर

हेमा तिवारी भट्ट

हेमा तिवारी भट्ट

कविता

March 27, 2017

?नव संवत्सर?

श्रृंगार सलोना
धरा धरा ने
क्या विस्मय है|
ऋतु नव अभिनव
शस्य पात नव
नव किसलय है|
चंचलता में
लिपटा यह मन
करे अभिनय है|
नव वेला के
सुअवसर पर
खिला हृदय है
मंगलमय हो
नव संवत्सर
ईश!,विनय है|
✍हेमा तिवारी भट्ट✍
आप सभी को नव संवत्सर 2074 की हार्दिक शुभकामनाएँ??????

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Author
हेमा तिवारी भट्ट
लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है, राग,द्वेष न घृृणा,कपट हो मानव के मन में , दिल में ऐसे ख्वाब सजाना अच्छा लगता है
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