Jan 1, 2017 · कविता
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नव-वर्ष संकल्प

मन वचन और कर्म से यारो मनन करें,
नये साल पर नया सा कुछ प्रण करें,
नया साल आया है नई आशायें लेकर,
नये साल का आओ अभिनन्दन करें,

नये नियम तुम यारो आज बनाकर देखो,
नये ढ़ंग से नव-वर्ष को मनाकर देखो,
नया पूराना जिनके लिये ईक जैसा है,
नव-वर्ष उन बच्चों के संग मनाकर देखो,
एक वक्त का खाना हम जो न खायेंगे,
एक वक्त का खाना उन्हे खिलाकर देखो,
मिले पगार जिस दिन कुछ ऐसा नियम बनाओ,
अनाथाश्रम में तुम भी कुछ ले जाकर देखो,
बच्चों को भी यारो संग ले जाना अपने
करुणा उनके अंदर एक जगाकर देखो,
तुम जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे,
सबको छाया दे वो पेड़ लगाकर देखो,
दान दिये से नही घटता बल्कि बढ़ता है,
दान की राशी यारो ज़रा बढ़ाकर देखो,
बच्चे में है ईश्वर तुमको देखना है गर,
रोता हो जो बच्चा उसे हँसाकर देखो,
रह न जाये कोई भी बच्चा पढ़ने से,
किसी एक का खर्चा यार उठाकर देखो,
पूजा पाठ से कहां तुम्हे भगवान मिलेगा,
पहले ख़ुद को ईक ईंसान बनाकर देखो,
फटे पूराने यारो सबके घर में होंगे,
ठण्ड़ में जो ठिठुरे,उसको पहनाकर देखो,
काम ये अपने बच्चों के हाथों करवाओ,
रात को जाकर चादर उन्हें ओढ़ाकर देखो,
सेहत अच्छी हो तो फिर सब कुछ अच्छा है,
वरना किसी अस्पताल में यारो जाकर देखो,
अपने से उपर देखोगे, रुसवा होगे,
तुमसे भी हैं कमतर, नीचे आकर देखो,
खाना पीना ,सोना ही कोई काम नही है,
ख़ुद को भी तुम यारो आज जगा कर देखो,
किसी के सपने को ही समझो तुम जो अपना,
किसी का छोटा सा सपना सजाकर देखो,
सोच ज़रा सी बदली तो फिर सब बदलेगा,
नया साल है,नई सोच बनाकर देखो!
-अरुण ‘बेताब’

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arun betaab
arun betaab
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