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नव रूप…..बेटियाँ

Beena Lalas

Beena Lalas

कविता

January 17, 2017

माँ अम्मा या हो आई हर रूप में बेटी समाई
बेटी बनकर दुर्गा आई झाँसी की रानी वो लक्ष्मी बाई
परम रुद्राणि परम ब्रह्माणि सत्यता की आकाश वाणी
रह गये दंग देखकर वो अद्वितीय शूरमायी

परिवार रूपी ध्वजा का चक्र चाहे हो तुम्हरा भाई
मगर तीनों रंगों में सिर्फ बेटियाँ ही समाई
हरित वसुंधरा का उर तुम शुभ्र शुचिता तुम में समाई
रंग केसरिया की बानगी देख तुम्हें इठलाई
घिर गया राजपूत बीच समन्दर जीवन की माँग रहा दुहाई
उसे बचाने बेटी आई और वो कहलाई जग मेहाई
अपने पुत्र का देकर बलिदान मेवाड़ की लाज बचाई
वो भी थी एक वीर बेटी पन्ना धाय वो कहलाई
क्या सुनाएं गाथा बेटीयों की कोई ना कर पाया उनकी भरपाई
पराक्रम की पराकाष्टा को मात देने बेटियाँ आई
चाहे दौड़ की हो उड़नपरी या कुश्ती की आज़माइश
स्वर्ण पदक दिलवाने में सबसे आगे बेटियाँ आई
तुम गर्व हो जुनून हो सॄष्टि सॄजन की अगुआई
हे नर श्रेष्ठ कन्या हत्या की ना करना भूल भारी
मिट जाएगा अस्तित्व तुम्हारा घड़ी वो होगी प्रलयकारी
प्रकृति की है धरोहर इन्हें देख वो हरषाई ये प्यारी सी बेटियाँ
है मेरी ही परछाई है मेरी ही परछाई ….।

Author
Beena Lalas
पति का नाम --खेम सिंह लालस शिक्षा --हिंदी स्नातकोत्तर MA भूतपूर्व आल इंडिया रेडियो एडवाइजर कमेटी मेंबर ईवेंट मेनेजर कविताये और हास्य व्यंग्य लिखती हूँ
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