नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

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_ सार छंद
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।
नवल रूप धरती पर बिखरा,मंगलमय ध्वनि छाई।

हीरे मोती सजे घास पर,
चमक रही हर क्यारी।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं,
सजी हुई फुलवारी।
शरद सुहानी वन- उपवन में,नूतन रंगत लाई ।
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

फूल फूल को तितली चूमे,
मधुवन यौवन छाया।
डाल डाल पर भँवरे गूँजें,
फूलों को महकाया।
मधुर मधुर चिड़ियों का कलरव,पड़ने लगा सुनाई।
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

धूप सखी की अँगुली पकड़े,
इधर-उधर मँडराये।
कुहरे की झीनी चादर में,
यौवन रूप छिपाये।
श्वेत सुगंधित सेवंती ने,छटा नयी बिखराई।
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

नई उमंगें है तन-मन में ,
मौसम लगता आला।
कितने रंग भरे जीवन में ,
कर देता मतवाला।
मेघ व्योम में घन-घन बाजे,मुखरित है पुरवाई।
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

धूमधाम से जश्न मनायें,
त्यौहारों का मेला।
जी भर के आनंद उठायें,
मौसम है अलबेला।
मुदित हुए सब जन मौसम में,बड़ी खुमारी छाई।
नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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