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नवरात्रि पर दोहे

(१)
घर-घर माँ की वंदना, आया है नवरात्र ।
मंदिर-मंदिर हो रहे, स्थापित मंगल पात्र ।।

(२)
देखो खूब धूम मची, माता के दरबार ।
सारे भक्त बोल रहे, माता की जयकार ।।

(३)
मंदिर- मंदिर सज रहें, देखो बजते ढोल ।
झाँकी मनमोहक बनी, दिव्य रूप अनमोल ।।

(४)
उमड़ी भीड़ गली-गली, खुशियों का नहीं अंत ।
माँ के दर्शन से मिले, मन को शांति अनन्त ।।

(५)
खुश होकर मैं नाचता, सुनकर जय जयकार ।
मन की पीड़ा मिट गई, मिला प्रेम उपहार ।।

(६)
पावन पर्व नौ दिन का, बहे भक्ति रस धार ।
जो डूबे इस भाव में, पाए ख़ुशी अपार ।।

(७)
धूमधाम से मानते, माता का यह पर्व ।
त्योहारों की भूमि यह, जिस पर करते गर्व ।।

(८)
माँ के चरणों में सदा, नमन करूँ यह शीश ।
यही हमारी सीख है, कहता है जगदीश ।।
—जेपीएल

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