नवगीत

मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….

गहरी नदिया दूर है जाना
मुश्किल हैं दिल को समझाना
लहरें करती मिलन को शोर
मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….
– ………………
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डूबें हैं सब गाँव नगरिया
देख, नांच रहे हैं सब ताल तलैया
चढ़ता पानी,चप्पू कमजोर ……………….
मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….
-…………..
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मेघा छाये ,मन हरसाये
बालक झट से नैय्या लाये
वन में नाचा नेह का मोर ………………….
मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….
*
मन का दादुर बोले दिन रैना
मिलन के बिना कहीं पाये न चैना
लगता खीचें कोई जैसे पतंग की ड़ोर ………
मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….
*
ढ़लने दे तू धार अभी
चल जायेगी पतवार तभी
फिर होगी मिलन की भोर ………………
मुसाफिर ! देख समय की ओर
मुसाफिर !देख समय की ओर ……….
*
रामकिशोर उपाध्याय

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मैं हिंदी में कविता ,ग़ज़ल ,मुक्तक ,कहानी और व्यंग्य लिखता हूँ |
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