नवगीत।बेटी घर की सुंदरता है ।

नवगीत।। बेटी घर की सुंदरता है ।। (बेटियां)

ईश्वर की अनुपम रचना है
प्रकृति का उत्तम उपहार
सतरंगी खुशियों वाली वह
भर देती जीवन में प्यार
रूप सलोने
बोल तोतली
अमृत रूपी कोमलता है ।
बेटी घर की सुंदरता है ।।1।।

देख तितलियों को इठलाती
रखे जुगनुओं तक की चाह
अपने मन का खेल रचाती
गुड्डे संग गुड़ियों का व्याह
फूलों जैसी
मुस्कानों से
आँगन सदा महकता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।।2।।

सुख में दुःख में सम व्यवहारी
रचती स्नेहिल परिवेश
माँ की ममता पिता वचन को
कभी न पहुँचाती वह ठेष
दुःख की रजनी
में हर्षाती
सुख में सच्ची सहजता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।।3।

बेटों से कम नही बेटियां
दिन दिन करती नव प्रयास
खेल खेल में हँसती गाती
रचती जाती है इतिहास
रौशन करती
नाम देश का
इन्हें रोकना बर्बरता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।।4।।

बेटी,पत्नी,बहू ,बहन बन
देती है पुरुषों का साथ ।
माँ बनकर ममता उमड़ाती
करती जीवन का सूत्रपात
हर पथ पर वह
नेह सँजोती
स्वाभिमान है ,निजता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।। 5।।

बेटी है हर घर की शोभा
करती है शोभित संसार
बहन बिना सूना लगता है
रक्षाबन्धन का त्यौहार
रीति रिवाज़ो
की भरपाई
कैसे कोई करता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।।6।।

बेटी वांछनीय धन सबका
बेटी है सुदृढ़ स्तम्भ ।
नव स्वर्णिम इस नव समाज का
बेटी ही करती प्रारम्भ
युगों युगों से
नव गेहो में
रोपी जाती एक लता है ।।
बेटी घर की सुंदरता है ।। 7।।

अंतरिक्ष हो , पर्वत चोटी
या कोई खेल निराला हो
राजसिंहासन की इच्छा या
चाहे विष का प्याला हो
पी जाती वह
समझ के अमृत
गौरव की जिसे सजगता है ।
बेटी घर की सुंदरता है ।। 8।।

©राम केश मिश्र

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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