कविता · Reading time: 1 minute

नर कंकाल

जब भी जहां भी मैं इस
नर कंकाल को।lदेखती हूं ।
तो बहुत डर सी जाती हूं ।
और ये सोचती हूं की ,
इंसान शैतान कैसे बनता है ?
अपने अति महत्वाकांक्षी मन के
दुष्प्रभाव से ,
या इस नर कंकाल की भयावता के
कारण से ?

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