” नये नये अंदाज़ तुम्हारे ” !!

रंग रंगीली ,
सजी है काया !
ऋतुओं का भी ,
मन भरमाया !
हंसी दर्प में ,
डूबी लगती –
ऐसा है विश्वास जगा रे !!

आँचल हाथों ,
बल खाता है !
रूप सजीला ,
लहराता है !
सभी की नजरें ,
आज थमी हैं –
लगे उल्लसित आज बहारें !!

चंचल नयना ,
हैं बाज़ीगर !
शहद धरा है ,
अधरों पर !
नखरों संग ,
बिखरे हैं कुन्तल –
मुखरित करते राज तुम्हारे !!

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