नया सवेरा हैं बेटियाँ................

हम सब की प्यारी
हैं बेटियाँ
सारे जग से न्यारी
हैं बेटियाँ
खेतों की एक क्यारी
हैं बेटियाँ
बाग की नई फुलवारी
हैं बेटियाँ
माँ-बाप की तो जान
हैं बेटियाँ
अपने देश की शान
हैं बेटियाँ
बनती खुद पहचान
हैं बेटियाँ
हम सब का सम्मान
हैं बेटियाँ
कुल का मीठा एहसास
हैं बेटियाँ
ऊंचाई में आकाश
हैं बेटियाँ
संगीत का एक साज
हैं बेटियाँ
सबके सिर का ताज
हैं बेटियाँ
प्रेम का एक धागा
हैं बेटियाँ
बन जातीं माँ दुर्गा
हैं बेटियाँ
मर्यादा की देवी सीता
हैं बेटियाँ
पानी जैसी शीतलता
हैं बेटियाँ
भोर का नया उजाला
हैं बेटियाँ
अमृत का एक प्याला
हैं बेटियाँ
कभी राधा कभी मीरा
हैं बेटियाँ
सती सावित्री, माँ गौरा
हैं बेटियाँ
अंधेरे में चमकता तारा
हैं बेटियाँ
जीवन का नया सवेरा
हैं बेटियाँ
– रमाकान्त पटेल
सुजवां, टहरौली ,झाँसी, उ.प्र.

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युवा रचनाकार , समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित । Gmail.- ramakantpatel141@gmail.com
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