कविता · Reading time: 1 minute

नमी बेबसी की

आँखों में नमीं बेबसी की है या ..
कमीं तेरी चाहत की है…
यूँ लम्हा लम्हा पिघल कर हम… …
खामोश जिए जाते हैं….
लगी दिल की जीने नहीं देती..
दर्द बस तन्हा पिए जाते हैं….
देखना कभी तड़पते
लम्हातों में हमें.. कि
जख्म, आह के तारो से
किस तरह सिए जाते हैं।
निधि भार्गव।

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