नमन शारदे

शारदा माँ को हमें नित सिर नवाना चाहिए ।
वन्दना कर के हमें उनको मनाना चाहिए ।।

है छटा अति श्वेत सुन्दर वेश की परिवेश की ।
नैन में उनकी सदा छवि को बसाना चाहिए ।।

हंसवाहिनि थाम वीणा नेह से हैं देखतीं ।
पूज कर उनके चरण मन में सिहाना चाहिए ।।

ज्ञान की देवी हमें तुम काव्य का कुछ ज्ञान दो ।
प्रार्थना कर के उन्हें हमको रिझाना चाहिए ।।

रंग सारे झिलमिलाते श्वेत के आगोश में ।
श्वेत जीवन सार है सबको बताना चाहिए ।।

छंद का माँ ज्ञान देना गीत की गति साधना ।
हम शरण हैं मात की कह मुस्कुराना चाहिए ।।

महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा ।
***

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