नमन बेटियों

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तुम सजाओ धरा ये गगन बेटियों।
आज जीवन बनाओ चमन बेटियों।।
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नाज इतना करें आज आवाम भी।
सब करें जोड़कर कर-नमन बेटियों।।
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राह कोई चलो ध्यान हो हर कदम।
पग धरो, तो जहाँ हो अमन बेटियों।।
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लोक तीनों उजाला रहे कर्म का।
कर्म की वो बनो तुम किरण बेटियों।।
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मान-सम्मान जग में सभी का मिले।
रूप ,माता, बहन, अवतरन बेटियों।।
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जुल्म सहना नहीं अब कभी तुम यहाँ।
जुल्म- दानव करो, तुम दलन बेटियों।।
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भूल से भी न हो कर्म ऐसा कभी।
सर झुके या बहे यह नयन बेटियों।।
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गीत लिखती रहे हर कलम शान पे।
फक्र करता रहे ये वतन बेटियों।।
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दिल दुआएँ करें हाथ आशीष दें।
यूँ बसो तुम सदा सब जहन बेटियों।।
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दो दुआ इस ग़ज़ल को पढ़ो तुम अगर।
हर जहाँ में करो तुम गमन बेटियों।।
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साथ मिलके कहो #जय सभी साथ में।
हर खुशी का तुम्हीं आगमन बेटियों।।

संतोष बरमैया #जय

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