कविता · Reading time: 1 minute

नफरत रखाना भी अच्छा नहीं है ।

जीवन है बहुमूल्य समझो इसे तुम।
इकपल गवाना भी अच्छा नही है।
भुला दो किया जो व्यवहार उसने।
नफरत रखाना भी अच्छा नही है।
सहयोग न कर सको तो भी क्या है।
पर पाप कमाना भी अच्छा नही है।
पौरुष को त्यागा बने क्यों अभागा।
समय यूँ गवाना भी अच्छा नही है।
बदल दो जो बाधा बनी है रुकावट।
यूँ आशू बहाना भी अच्छा नही है।
समझता है सब कुछ किये जो परेशां।
विन्ध्य कहे कोई बच्चा नही है।
#विन्ध्यप्रकाशमिश्रविप्र

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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै मौलिक विचारों के बिम्ब को लिपिबद्ध करता हूँ । स्वान्तःसुखाय लिखता हूँ । किसी प्रसिद्धि…
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