गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

नज़रें झुक गयी जबसे तुम्हारी अज़मत जानी है

कितनी ठोकरों के बाद हमने तुम्हारी कीमत जानी है,
जीवन संवर गया जबसे खुदा की दी नैमत*1 जानी है।

कितना ही ग़ुरूर दिखाते थे सब नादानी थी हमारी,
नज़रें झुक गयी हैं जबसे तुम्हारी अज़मत*2 जानी है।

वो पहली बार नज़रें मिलने पर तुम्हारा पलकें झुका लेना,
बहुत सोचने पर हमने तुम्हारी अस्मत*3 जानी है।

कितनी ही मुस्कुराहटें बख्शी थीं यूँही हमें आपने,
एक मायूस से जीवन पर हुई आपकी रहमत*4 जानी है।

जब एक मुस्कान भी दुनिया में महंगी लगने लगी,
तब इस दिल ने आपकी एहमियत*5 जानी है।

*1 नैमत : Blessing, वरदान
*2 अज़मत : Might, महानता
*3 अस्मत : Purity, पवित्रता
*4 रहमत : Mercy, दया
*5 एहमियत: Importance, महत्व

————–शैंकी भाटिया
सितम्बर 30, 2016

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