गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

नजर

नज़र
तेरी तिरछी नज़र इस तरह पड़ी,
की दिल में हलचल मचा गए।
एक हसीं में इस दीवाना को,
मोहब्बत की शोला जगा गए।।
कई चेहरे तुझे देख के इस तरह गुजर गए।
मुझमें ऐसा क्या चीज है मेरा चेहरा उतार गए।।
कहीं चांद राहों में खोया,
कहीं चांदनी रात भटका गए।
मैं चिराग ओ भी बुझा हुआ,
मेरी रात कैसे चमका गए।।
इशारों इशारों में ही प्यार की नगमे बता गए।
मुझमें ऐसा क्या चीज है कि मुझसे दिल लगा गए।।
होंठो में उल्फत नाम हो गए,
आंखो में छलकता जाम हो गए।
तलवार की जरूरत वहां कैसे,
जहां नजरो से कत्ल-ए-आम हो गए।।
*************************************
रचनाकार कवि डीजेन्द्र क़ुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभवना,बिलाईगढ़,बलौदाबाजार (छ.ग.)
‌मो . 812058782

1 Like · 41 Views
Like
Author
284 Posts · 13.4k Views
परिचय नाम -- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पिता -- श्री गणेश राम कुर्रे माता -- श्रीमती फुलेश्वरी कुर्रे शिक्षा -- बीएससी(बायो)एम .ए.हिंदी ,संस्कृत, समाजशास्त्र ,B.Ed ,कंप्यूटर पीजीडीसीए व्यवसाय -- शिक्षक जन्मतिथि…
You may also like:
Loading...