23.7k Members 50k Posts

नई दिल्ली

हज़ारों ख़्वाब जनता को दिखाती है नई दिल्ली
मगर जनता को अक्सर भूल जाती है नई दिल्ली

न तो रहने न ही खाने का बंदोबस्त है कोई
मगर फिर भी ग़रीबों को लुभाती है नई दिल्ली

नई दिल्ली दिखाती है सभी को स्वर्ण के कंगन
दिखाकर स्वर्ण के कंगन फंसाती है नई दिल्ली

जिधर देखो अँधेरा ही अंधेरा है , मगर फिर भी
हमें लगता है ऐसा जगमगाती है नई दिल्ली

नई दिल्ली की बातों पर यकीं हरगिज़ न करना तुम
किसी को कुछ किसी को कुछ बताती है नई दिल्ली

शिवकुमार बिलगरामी

3 Views
Shivkumar Bilagrami
Shivkumar Bilagrami
12 Posts · 194 Views
शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक...
You may also like: