नंद के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की

*भगवत गीता के उपदेशक:- भगवान श्री कृष्ण*

संदर्भ:- 24 अगस्त श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

– राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
कवि,साहित्यकार

भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्ठमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था इसीलिए हम प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति दीर्घायु तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है। श्रीकृष्ण भगवान की पूजा करने से पूर्व हमें पूजा सामग्री तैयार करनी होती है जिसमें धूप बत्ती अगरबत्ती कपूर केसर चन्दन यज्ञोपवीत पाँच कुंकु चावल अबीर गुलाल अभ्र्क हल्दी आभूषण रुई रोली सिन्दूर सुपारी पान के पत्ते पुष्पमाला सहित कई सामग्री से पूजा की जाती है।
योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो गीता का उपदेश दिया उसे श्रीमद्भगवतगीता के नाम से संकलित किया है। गीता के उपदेशों से जीवन का वास्तविक लक्ष्य हाँसिल किया जा सकता है। कर्म धर्म यज्ञ ज्ञान योग आदि की सरल व सारगर्भित व्याख्या की गई है। गीता सुगीता कर्तव्या कि मन्ये शास्त्र संग्रह या स्वयं पद्मनाभस्य मुख पद्मादिनी सृता।
गीता भली प्रकार मनन करने योग्य शास्त्र है जो पद्मनाथ श्रीमुख की निःसृत वाणी है। फिर अन्य अन्य शास्त्र एकत्रित करने की क्या आवश्यकता है। गीता वेदों का सार है । गीता हमें कर्म करने की शिक्षा देती है। विद्यार्थियों के लिए कर्म करना जरूरी है। सत्कर्म कर व्यक्ति महात्मा बन सकता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी गीता के श्लोकों से क्रांतिकारियों ने अपने भीतर नई ऊर्जा पैदा की। नया जोश आया। गाँधीजी ने गीता के ज्ञान से आज़ादी दिलाई। हमारे सैनिकों को गीता ज्ञान से सरहद पर देश की रक्षा करने की सीख मिली।
श्रीकृष्ण के अनुयायी हिन्दू नेपाली ,भारतीय नेपाली और भारतीय प्रवासी है। यह त्योहार भारत के साथ साथ विदेशों में भी मनाया जाता है। इस त्यौहार को मनाने का उद्देश्य भगवान कृष्ण के आदर्शों को याद करना है। इस उत्सव में प्रसाद बाँटना भजन गाना आदि का आयोजन होता है। रात को भगवान बारह बजे जन्मे थे इसलिए देर रात तक आरती भजन चलते हैं। मथुरा वृंदावन सहित बृज चौरासी में ये त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है। मंदिरों को खूब अच्छे से अलंकृत किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाई जाती है। व्रत पूजन की परम्परा है। कान्हा की इस दिन मोहक छवि कप देखने के लिए देश विदेश से दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण विभिन्न चैनलों द्वारा होता है। इस दिन मंदिरों में भगवान को झूला झुलाने की प्रथा है। रासलीलाओं का आयोजन भी होता है।
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भव्य चाँदनी चौक दिल्ली के बाजारों से लड्डू गोपाल के कपड़े खरीदते हैं।सभी मंदिरों को खूब सजाया जाता है।
विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण को माना जाता है। त्रेता युग के अंत और द्वापर के प्रारम्भ में अत्यंत पापी कंस उतपन्न हुआ। द्वापर युग मे मथुरा मर राजा उग्रसेन का राज था। उसका बेटा कंस था जिसने राजा उग्रसेन को गद्दी से उतार दिया और वह स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी।जिसका विवाह वसुदेव नाम के यदुवंशी सरदार से हुआ था। एक बार कंस अपनी बहिन देवकी को उसके ससुराल पहुचाने जा रहा था । रास्ते मे अचानक आकाशवाणी हुई हे कंस जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उतपन्न आठवाँ पुत्र तेरा वध करेगा। आकाशवाणी सुनते ही कंस अपने बहनोई वसुदेव को जान से मारने के लिए उठ खड़ा हुआ। देवकी ने उसे रोककर कहा मेरी जो भी संतान होगी मैं तुम्हारे सामने ला दूँगी। कंस ने बहन की बात मान ली और मथुरा आ गया।
कंस ने देवकी ओर वसुदेव को कारावास में डाल दिया और कड़े पहरे लगा दिये। जिस समय कृष्ण हुआ उसी समय यशोदा जी के भी कन्या का जन्म हुआ। जिस कोठरी में देवकी थी उसमें भगवान प्रकट हुए शंख चक्र गदा पदम् लिए दोनों भगवान के चरणों मे गिर गए। तब भगवान ने कहा मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूँ। तुम मुझे इसी समय मंद के घर बृंदावन में भेज आओ। और उनके यहाँ जो कन्या जन्मी है उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। तुम तनिक चिंता न करो ये सब दतवाज़े खुल जाएंगे। यमुना का जल उत्तर जाएगा। जैसा भगवान ने वसुदेव को आदेश दिया उसने वैसा ही किया। कन्या को कोठरी में रख दी गई। कंस आया उस कन्या को धरती पर पछाड़ने की सोचने लगा। लेकिन वह कन्या आकाश में उड़ गई। वहां से कहा अरे मूर्ख कंस मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारने वाला तो वृंदावन जा पहुंचा है। मेरा नाम वैष्णवी है। वह तुझे पापों की सजा देगा।
नन्द के घर कृष्ण को मारने के लिए पूतना राक्षसनी भेजी। जिसका वध भगवान ने किया। कालिया नाग का वध किया।अक्रूर जी नंदगांव से कृष्ण और बलराम को मथुरा लाये। मथुरा आने पर कंस के पहलवान चाणूर ओर मुष्टिका का उद्धार किया। कंस के भाई केशी सहित कंस का भी भगवान ने उद्धार किया। देवकी व वसुदेव को कारावास से बाहर निकाला। उग्रसेन को वायस राजगद्दी दिलाई। कृष्ण बलराम की कई लीलाएं हुई। महाभारत के युद्ध मे श्रीकृष्ण ने गीता के अठारह अध्याय में उपदेश किये जो अमर है।
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिभवती भारत अभ्युत्थानम अधर्मस्य ग्लानिभवती भारत ।
जब जब धर्म की हानि होती है प्रभु अवतार लेते हैं। जो शिक्षाएं देते है उन्हें जीवन मे उतारना चाहिए।
98 पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी
भवानीमंडी जिला झालावाड
राजस्थान

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