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ध्वनि प्रदूषण

Maneelal Patel मनीभाई

Maneelal Patel मनीभाई

कविता

April 19, 2017

ध्वनि प्रदूषण
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प्रार्थना मन से ,अजान दिल से की जाये
तो सारी मन्नतें पूरी हो जाती है।
तो फिर रब का घर दूर है क्या ?
जो लाउडस्पीकर से पुकारी जाती है।

विवाह तो दो दिलों का मेल हैं जिसमें ,
विदाई की मधुर शहनाई बजाई जाती है ।
आजकल तो डीजे में एल्कोहाॅलिक शोर में
दुल्हे के संग दुल्हन को नचाई जाती है।

जीत का उत्सव हर्षोल्लास मनाना हो
तो एक दूजे को गले मिल बधाई दी जाती है।
कान के पर्दे फाड़ू आतिशबाजी करके
क्यूँ कोलाहल में ध्वनि प्रदूषण की जाती है ।

माना सरकार के शोर नियंत्रण कानून हैं
सार्वजनिक स्थलों में मनाही की जाती है ।
पर हम महामानव को अपने हित की बातें
जल्दी समझ में कब और कहाँ आती है ?

शोर शराबे से मानव स्वास्थ्य बिगड़ता
तनाव और चिड़चिड़ेपन का होता शिकार है ।
अब हर पल कोलाहल में जिन्दगी बीते
तो समझो ,ऐसे जीवन को जीना बेकार है ।

क्यूँ हम निजी स्वार्थ के वशीभूत होके
दूसरों की शांति छीनने को बेकरार हैं ।
अब वो समय है आ गया कि चिन्तन करें
जब ध्वनि, श्रवण क्षमता के सीमा पार है।
(✒रचयिता :- मनी भाई भौंरादादर, बसना )

Author
Maneelal Patel मनीभाई
मैंने रोमांटिक मोमेंट पर 1000 गीत लिखे हैं । अब नई कविता, हाईकु और छत्तीसगढ़ी कविता पर अपना मुकाम बनाना चाहता हूँ ।
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