*"धैर्यवान'*

*”धैर्यवान”*
पूरे विश्व में केरोना विषाणु के संक्रमण से कोहराम मचा हुआ है इस समय सभी जगहों पर लॉक डाउन याने घरों में कैद हो गये हैं और स्कूल ,कालेजों में भी छुट्टी कर दी गई है।
जीवन की असली परीक्षा की घड़ी आई है इस महामारी संक्रमण से बचने के लिए घरों में रहना ही सुरक्षित है जो सभी के लिए नियम लागू कर दिया गया है। केरोना वायरस के लड़ने की जंग है जिसे हमें पूरे देशवासियो के साथ सारी दुनिया को सावधानी बरतनी होगी और इस समय का दौर संयम बरतने धैर्य रखने की जरूरत है।
घर के सारे सदस्यों की ज़िम्मेदारी बड़ गई है खासकर महिलाओं को ज्यादा ध्यान व समय घरों में देना पड़ रहा है कामवाली बाई भी नही आ रही है और स्कूल कॉलेज भी बंद हो गए हैं पुरुषों की भी ऑफिस से छुट्टी दे दी गई है ऐसे समय मे महिलाओं के काम की जिम्मेदारी बढ़ गई है बच्चे भी परेशान हो रहे हैं घर मे कैदी बनकर ही रह गए हैं।
इस कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन में धैर्य व संयम का परिचय देना आवश्यक हो गया है अपने साथ घर परिवार के सभी सदस्यों की जरूरतों को पूरा करना बहुत ही बड़ा कार्यभार सम्भालना पड़ता है।
एक दो दिन की बात होती तो चल जाता लेकिन पूरे 21 दिनों तक घरों में कैद रहना बहुत ही कठिन काम हो गया है।
ऐसे में पुराने जमाने के खेल खेलते हुए , पुराने किताबो को पढ़ने में, घरों की साफ सफाई अभियान चलाकर सभी सदस्यों द्वारा मिलजुलकर ये कठिन दिनों को बिताया जा सकता है।
रामचन्द्र जी ने 14 वर्ष वनवास में बिताया , रावण द्वारा सीता हरण कर अपने लंका में ले जाने पर सीता मैया जी ने भी ना जाने कितने दिनों तक भूखे प्यासे रहकर अशोक वृक्ष के नीचे बिताया था। फिर हम तो तुच्छ मानव जाति कुछ दिनों तक घर में कैद रहकर सुकून से शांतिपूर्ण तरीके से धैर्य का परिचय दे सकते हैं ।
कहावत चरितार्थ होती है –
*धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय*
*माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आये फल होय*
कहने का मतलब यह है कि पूरी दुनिया में विषाणु इस कदर हावी हो रहा है फैल रहा है इससे बचाने के लिए सुरक्षित जीवन के लिए कुछ समय चाहिए इसके लिए सभी व्यक्तियों को थोड़ा सा संयम रखने धैर्यता का परिचय देना ही होगा।
जय माता दी

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