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धूम्रपान की शुरुआत क्यों हुई?

जब प्राचीन समय में मानव के पास मुंह के इलाज के लिए किसी
प्रकार दवा नहीं थी।उस आदि मानव ने एक पत्ती के धुंए का उपयोग करना शुरू किया। मनुष्य जब भोजन करता है तब मुख में दुर्गंध आने लगती है।उस दुर्गंध के कारण मुख में विक्टिरिया उत्पन्न होने लगते हैं।उनको नष्ट करने के लिए तेंदु नामक पौधे के पत्ते का धुआं एक दवा काम करता है। लेकिन उसे केवल भोजन करने के बाद एक बार ही उपयोग करना था। लेकिन आजकल लोगों ने उसका ज्यादा उपयोग करने लगे।उसका जो मुख्य उद्देश्य था उससे भटक गये। हमने उसे केवल मुख की शुद्धि के लिए बनाया गया था। आज हमने उसे एक नशा के तौर पर उपयोग करना शुरू कर दिया है। मनुष्य के मुख के अन्दर बहुत से कीटाणु जन्म लेते हैं। क्योंकि मुख शरीर का बहुत नाज़ुक हिस्सा होता है।
और उसी समय से ही मनुष्य ने धूम्रपान की शुरुआत कर दी है।

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