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” ——————————- धूप सी खिलती है ” !

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गज़ल/गीतिका

February 7, 2017

रंग यहाँ खिलते हैं , मस्तियाँ छलकती है /
मुस्कराकर ज़िन्दगी , यहाँ गले मिलती है //

संग यहाँ जीना है , संग यहाँ मरना हैं /
उम्र सीढियों से यहाँ , धूप सी फिसलती है //

हमने भरोसा किया , भरोसे पे जीते हैं हम /
काँटों पे दिल रखकर , यहाँ कली खिलती है //

हमने किये ही नहीं , सत्य से समझोते /
दर्द हो शिखर पर तो , पीड़ा मचलती है //

माँ खड़ी दरवाजे , मेरी भूख उसकी है /
वक्त की तराजू पर , आरजू मचलती है //

दबे पांव आँखों में , सपने उतरते हैं /
इठला के अम्बर में , साँझ सदा ढलती है //

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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