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कितने संघर्ष आसान हुऐ

Neelam Naveen

Neelam Naveen "Neel"

मुक्तक

February 22, 2017

धुंध के मानिंद
आज एक बार
सुरों से अलग
फिर कहीं गुजरे
सोंचों के झांझावतों
चिरपिरिचत विचारों में
किसी राहगीर की तरह
परंतु बिना किसी योजन
मानचित्र के, बस यूंही
कुछ राहें याद तो थी
किंतु वे धुमिल और
बहुत धुंधला गयी थी
याद भी नही जैसे
जाने कितना समय
गुजरा होगा,पाटने में
उमर की खाईयों को
कदाचित अनुभवों की
सूची और फाईलों को
राहगीर हैं, कितने बार
आना जाना लगा रहता है
किंतु हैरान है,बेखयाली में
भागते हुए सीधी टेढी राहों में
अरसों से मालूम नही जीवन में
कितने अनगिनत आयाम बने
जाने कितने संघर्ष आसान हुऐ
यूं ही बस चलते कभी रेंगते !!

नीलम “नील”
देहरादून

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Author
Neelam Naveen
शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में । कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । स्थान : अल्मोडा

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