कविता · Reading time: 1 minute

धारा 370

न्यारा था जो हिन्द से अब तक आज हमारा हो गया
स्वर्ग से सुन्दर जान से प्यारा कश्मीर हमारा हो गया
एक देश में एक ही कानून का फतवा जारी हो गया
370 धारा का तगड़ा लफड़ा पल में रफूचक्कर हो गया
हर जन होगा एकसमान किसी का न होगा विशेष मान
एक देश के हर जन गण का इक ही तराना हो गया
हाली-पाली,व्यापारी,नर-नारी खुशी के नशे में चूर हैं
नाच गा कर झूम झमा कर मनाने का महोत्सव हो गया
35 ए धारा का था जो पंगा वो भी ठन्डा हो गया
एक डन्डे में एक जैसा ही झन्डा वो भी तिरंगा हो गया
जम्मू व कश्मीर में घर घर तिरंगा फहराया जाएगा
भारत के इतिहास में 5अगस्त दिन स्वर्णिम हो गया
कश्मीर से कन्याकुमारी तक का रंग सुनहरी हो गया
प्यार और व्यापार का फंडा सर्व विस्थापित हो गया
जो भी कहीं पर बसना चाहे रसना चाहे हसना चाहे
एक जैसे कायदे कानून का संविधान लागू हो गया
सदैव याद रहेगी जय वीरू सरीखी मोदी शाह की जोड़ी नामुमकिन को मुमकिन कर अधूरा सपना पूरा हो गया

सुखविंद्र सिंह मनसीरत

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