धात्री

धात्री (माँ)

अग्नि जल वायु अम्बर धरा
पंच तत्व की पावन काया धात्री
मलय बयार सी शीतल निर्मल
निर्झर स्नेह बरसाये जन्मदात्री

ललाट फैली बिंदी उलझे केश
कमर खोंसती आँचल धात्री
कभी तनी सी कभी झुकी सी
घर आँगन में चलती जन्मदात्री

धरती नौ माह शिशु भार
देती अभिनव आकार धात्री
रक्त कणों से कर सिंचित
नव पुष्प खिलाये जन्मदात्री

अंक लगाये मृदु लोरी सुनाये
प्रेमामृत नित पिलाये धात्री
द्रिग पुलिनों से काजल चुरा
बुरी नज़र उतारती जन्मदात्री

गहन तिमिर तपिश या ठोकर
हर पल साथ निभाए धात्री
अनपढ़ है पर झट पढ़ लेती
छिपे दर्द पीड़ को जन्मदात्री

हो पुत्र कपुत्र कठोर स्वार्थी
कुमाता कभी न हुई धात्री
लक्ष्मी सरस्वती दुर्गा स्वरूपा
कभी हार न माने जन्मदात्री

पैरों के नीचे है स्वर्ग बसा
मस्तक पर क्या धरती धात्री
समता में भगवान भी फीका
उपमा उपाधि से परे जन्मदात्री

रेखा

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