कविता · Reading time: 1 minute

धर्म

एक शाश्वत सत्य
जैसे ह्रदय स्पंदन
रूप अनेक
पर एक सार….
कुछ मेरा भिन्न
कुछ तुम्हारा अलग
मेरा अच्छा और
न ही तुम्हारा बेहतर….
आगोश में इसके
श्वास पाता
जड़ से चेतन हो जाता
जीवन का हर कर्मक्षेत्र….

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