Skip to content

धर्म कोई कहता नहीं

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

June 19, 2017

दर्द दे कर तूने क्या पाया ?
क्या दर्द देने ही जहां में आया ?

देकर खुशियां थोड़ी खुशियां ले लो,
ऐसे न तुम जीवन से खेलो,

जीने दो औरों को और तुम खुद भी ,
अपना जीवन जी लो,

पत्थर सा तेरा दिल क्यों है?
धर्म के नाम मरता मारता क्यों है ?

मासूम बेगुनाहों को बेवजह,
डरा धमका संघारता क्यों है ?

धर्म कोई कहता नहीं हैl
जान लेने देने को,
गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबल ,गीता और कुरान तुम देखो, एक एक पन्ने मानवता का संदेश देते भगवान देखो ,

इंसान बन धरा पर आया ,
इंसानियत का न तुझे ,
कोई यहां पाठ पढ़ाया l
उल्टी-सीधी बातें बता कर तुझे तेरी राह से भटकाया,

जीवन तेरा तेज हवा का झोंका ,
कब आया कब चला गया ,
तुझे इसका भान नहीं कि तू कितना यहां छला गया l

©® रीता यादव

Share this:
Author
Rita Yadav

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you