माँ की गोद...

कुंडलिया छंद

आश्रय देकर गोद में, सदा लुटाती प्यार ;
धरती धीरज धारणी, सहती कष्ट अपार ;
सहती कष्ट अपार, सभी मन शांति डालती ;
देती अन्न अपार, सभी का पेट पालती;
पाठक जी फिलहाल , बताते माँ है धरती;
हिंदु हो या मुस्लिम, सभी को आश्रय देती||

जनार्दन पाठक उर्फ आर्यन पाठक ‘शायर’
हरदोई

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 31

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 6 Comment 38
Views 140

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share