Jun 10, 2021 · कविता
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धरती का श्रृंगार

चलो ! धरती का श्रृंगार करते है
उसके जीवन में रंग भरते हैं।

वृक्षारोपण अभियान चलाकर ,
अनगिनित पेड़ पौधे लगाकर ,
हरियाली से उसका आंचल रंगते है।

नदियों को उसकी पवित्रता लौटकर,
सरोवरों ,झरनों ,पोखरों को भर कर,
जल स्त्रोतों का भंडार भरते हैं।

शुद्ध हवा मिले अधिक से अधिक,
मनुष्यों हेतु प्राण वायु सर्वाधिक,
चलो ! वृक्षारोपण करते है ।

धरती माता के जीवन हेतु ,
सभी मनुष्यों के जीवन हेतु ,
एक प्रदूषण रहित पर्यावरण बनाते हैं ।

चलो ! हम सब मिलकर एक प्रण करते है।
धरती को ही स्वर्ग सा सुन्दर बनाते हैं।

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ओनिका सेतिया 'अनु '
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा... View full profile
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