धड़क-धड़क दिल - (घनाक्षरी)

धड़क धड़क दिल धड़क रहा है मेरा।
चेहरा तुम्हारा मेरे सामने जो आया है।।
नजरों का नजरों से मिलन जो होने लगा।
जगा -जगा रात भर तुझको जगाया है।।
उगाया बीज प्यार का नीर सींचा प्यार का।
बढ़ चली बेल आगे, हमको महकाया है।।
फूल भी खिलेंगे और फल भी मिलेंगे हमें।
जीवन सफल होगा, नेह जो उगाया है।।
राजेश व्यास अनुनय

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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको,...
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