दोहे · Reading time: 1 minute

धड़कन पहरेदार

उर के भीतर आ गया, जबसे तू दिलदार।
नैन किवाड़ी बंद हैं, धड़कन पहरेदार।।

सन्तोष कुमार विश्वकर्मा सूर्य

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