Aug 5, 2016 · कविता
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दौड़े चले जा…

जिंदगी की पटरी पर दौड़े
चले जा रहे है,
कुछ छूट रहा है
कुछ छोड़े चले जा रहे है
एक दूसरे को पीछे छोड़ने की
होड़ में दौड़े चले जा रहे है
जिंदगी की पटरी पर दौड़े
चले जा रहे है,
पुराने रिश्तों को छोड़
नये जोड़े जा रहे है
निभाने का कोई वायदा नही
बस मतलब से निभाये जा रहे है
जिंदगी की पटरी पर दौड़े चले
जा रहे है,
खोखले रिश्ते, झूठी शान,
दिखावटी मुस्कान
ऊँची दुकान-फीके पकवान
लालची मेहमान ,बदलते इंसान ,
के लिये दौड़े चले जा रहे है
दौड़े चले जा रहे है***
बनावट के इस दौर में
दौड़े चले जा रहे है***

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज... View full profile
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