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दौड़ा चला जा रहा है….

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

August 10, 2016

बस इंसान दौड़ा चला जा रहा है,
उदासी की गठरी सर पर उठाय
बस जिये जा रहा है,
पल पल मरे जा रहा है
एक उम्मीद की खोज में
बस इंसान दौड़ा चला जा रहा है
उदासी की गठरी सर पर उठाय
खुशियों के झूले में झूलने का सपना
मन में लिये,
मन से ही द्वन्द युद्ध करते हुए
कभी हारते हुए,कभी जीतते हुए
एक उम्मीद की खोज में
बस इंसान दौड़ा चला जा रहा है,
उदासी की गठरी सर पर उठाय।।

^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^

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Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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