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दो मुक्तक

तेजवीर सिंह

तेजवीर सिंह "तेज"

मुक्तक

February 2, 2017

जन्मों-जनम् का प्यासा मुझको भी प्यार देदे।
हो जाऊँ तृप्त ऐसी शीतल फुहार देदे

मंडराते शोख़ भवरे कलियों से जो भी चाहें।
मुझको भी आज रस वो जाने-बहार देदे।
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कली के फूल बनने में चमन का भी सहारा है।
करे रसपान फूलों का वो इक भंवरा कुँवारा है।
प्रकृति की अनौखी रस्म है आधार सृजन का।
कभी है स्वाद में मीठा कभी नमकीन-खारा है।
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Author
तेजवीर सिंह
नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं... Read more
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